समुद्री निगरानी और गश्त बढ़ाने के लिए मंगलवार को वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट ‘आइएनएस तारासा’ को नौसेना में शामिल कर लिया गया।

पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने इस पोत को नौसेना में शामिल किया।

इसे मुंबई में ही तैनात किया जाएगा।

इसका नाम अंडमान-निकोबार के एक टापू पर रखा गया है।

 



 

नौसेना ने उम्मीद जताई है कि निगरानी और गश्त के अलावा इस पोत से कानून के अनुपालन, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी मदद मिलेगी।

इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है।

इस तरह के तीन पोतों को पहले ही नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

आइएनएस तारमुगली को पिछले साल मई में और आइएनएस तिहायु को पिछले साल अक्टूबर में नौसेना में शामिल किया गया था।

उन्हें विशाखापट्टनम में तैनात किया गया है।

आइएनएस तिल्लनचांग को इस साल मार्च में नौसेना में शामिल किया गया और उसे कारवार में तैनात किया गया है।

खास बात यह है कि नौसेना में ‘आइएनएस तरासा’ के नाम से यह दूसरा पोत है।

इस नाम का पहला पोत 1999 से 2014 तक नौसेना का हिस्सा था

लेकिन बाद में उसे सेशेल्स तटरक्षक बल को उपहार में दे दिया गया था।

 

 


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