पाकिस्तान को दरकिनार कर चाबहार बंदरगाह के जरिये भारत ने गेहूं अफगानिस्तान भेजा। गुजरात के कांदला बंदरगाह पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गेहूं से लदे जहाज को हरी झंडी दिखाई।

इस मौके पर अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े रहे। भारत के लिए यह है, क्योंकि पाकिस्तान उसे अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोक चुका है। पहले जो भी सहायता अफगानिस्तान भेजी जा रही थी, वह पाकिस्तान के जरिये होकर जाती थी, लेकिन पड़ोसी देश के अड़ियल रवैये से भारत को वैकल्पिक मार्ग तलाश होने पर विवश होना पड़ा।

इसकी नींव तब पड़ी जब पीएम नरेंद्र मोदी 2016 में ईरान की यात्र पर गए थे। तब तीनों देशों भारत, ईरान व अफगानिस्तान के बीच सहमति बनी थी। भारत व अफगानिस्तान पहले ही वायु मार्ग से माल की ढुलाई पर सहमत हो चुके हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि इससे व्यापार का नया मार्ग विकसित होगा। अफगानिस्तान के लोगों की सहायता करने में भारत को सहूलियत होगी।

उनका कहना है कि अब भारत को अफगानिस्तान से व्यापार करने में पाक की धरती की जरूरत नहीं होगी। उनका कहना है कि यह पहला जहाज है। अभी गेहूं से लदे छह और जहाज वहां रवाना किए जाएंगे।

स्वराज ने कहा कि भारत के लोगों की तरफ से यह अफगानिस्तान की जनता को उपहार है। इससे दोनों देशों के बीच भाईचारा बढ़ेगा। उनका कहना है कि तीनों देश सदियों से एक दूसरे से जुड़े हैं। सांस्कृतिक संबंध एक दूसरे से बेहद मजबूत रहे हैं।

भारत अपने संकल्प पर कायम है कि वह अफगानिस्तान में हालात अनुकूल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े

पाक के अड़ियल रवैये से भारत को वैकल्पिक मार्ग तलाश होने पर होना पड़ा विवश

 


 

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