देश में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी तकनीक से निर्मित परमाणु ऊर्जा के दस संयंत्र लगाए जाएंगे।

दाबित भारी जल (प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर) के दस परमाणु संयंत्र लगाए जाएंगे । इनकी कुल स्थापित क्षमता सात हजार मेगावाट की होगी।

ये परमाणु संयंत्र सरकारी कंपनियां और सरकारी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित करने वाली कंपनियां ही लगा सकेंगी ।

 

अपनाए जाएंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मापदंड

इन संयंत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मापदंड अपनाए जाएंगे। इससे घरेलू उद्योगों को करीब 70 हजार करोड़ रूपए के ऑर्डर मिलने की संभावना है।

इसके साथ ही 33400 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे । ये संयंत्र परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मेक इन इंडिया की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक होंगे ।

इस वक्त देश में संचालित 22 परमाणु संयंत्र

इस समय देश में 22 परमाणु संयंत्र संचालित है जिनकी चालू स्थापित क्षमता 6780 मेगावाट है जबकि 6700 मेगावाट की क्षमता वाली परमाणु संयंत्र परियोजनाएं निर्माणाधीन है। निर्माणाधीन परियोजनाओं के 2021-22 तक चालू होने की संभावना है।

ये दस संयंत्र अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित तथा सुरक्षा के उच्च मापदंडों का पालन करते हुए 700 मेगावाट के ताजा डिजायन के पीएचडब्ल्यूआर की योजना का हिस्सा हैं ।

जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में अहम कदम

जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में यह फैसला ऐतिहासिक है। यह स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा को बढ़वा देकर कार्बन उत्सर्जन कम करने पर पेरिस में की गई प्रतिबद्धता पर भारत की गंभीरता को दर्शाता है ।

यह पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदनशीलता का भी परिचायक है। यह हमारे वैज्ञानिकों के प्रति सम्मान भी है जिनमें अपार क्षमता एवं कुशलता है । इससे पता लगता है कि हमारे वैज्ञानिकों ने परमाणु संयंत्र के विकास में हर तरह की स्वदेशी तकनीक का विकास किया है ।

भारत ने पिछले करीब 40 वर्षों में परमाणु संयंत्र बनाने और उनके संचालन में अपने अच्छे रिकार्ड का लोहा दुनिया में मनवाया है ।

 


 

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