रूस की एक सरकारी कंपनी ने उत्तर कोरिया को इंटरनेट का दूसरा कनेक्शन दिया है। उच्च क्षमता वाले इस कनेक्शन से उत्तर कोरिया की साइबर ताकत बढ़ गई है। इससे उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयास को धक्का लगा है।

इस बीच अमेरिका ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और प्रभावशाली करने पर कार्य शुरू किया है। इसके लिए संसद से 440 मिलियन डॉलर (2,860 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त बजट स्वीकृति की दरकार है। 1ट्रांस टेलीकॉम द्वारा दिए गए इस कनेक्शन का पता रविवार को लगा। यह सन 2010 में चीन की कंपनी चाइना यूनीकॉम के दिए इंटरनेट कनेक्शन के अतिरिक्त होगा और उसे मजबूती देगा।

इस नए कनेक्शन से उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क में होने वाले किसी हमले या गड़बड़ी से निपटने में मदद मिलेगी। नया कनेक्शन उत्तर कोरिया के साइबर नेटवर्क को अतिरिक्त ताकत मुहैया कराएगा। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रलय के अनुसार उत्तर कोरिया के पास 6,800 साइबर युद्ध विशेषज्ञों की फौज है।

यह दूसरे देशों पर कई बार साइबर अटैक कर चुकी है। सन 2014 में इसी ने सोनी पिक्चर्स की हैकिंग थी।

उत्तर कोरिया के साथ युद्ध के खतरे के चलते अमेरिका ने अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रलय ने संसद से बजट में और बढ़ोतरी का अनुरोध किया है। मिसाइल डिफेंस के बजट में अमेरिकी रक्षा मंत्रलय को पहले ही 8.2 अरब डॉलर (करीब 53 हजार करोड़ रुपये) की रकम मिल चुकी है।

 


 

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