समुद्री अनुसंधान

समुद्री अनुसंधान
समुद्री अनुसंधान

भारत ने समुद्र की गहराइयों में संपदा खोज और अनुसंधान कायरे के लिए धातु रहित प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है। इस स्वच्छ प्रौद्योगिकी के चलते समुद्र के भीतर से लिए जाने वाले नमूनों में प्रदूषण अंश आने की आशंका नहीं रहती।

राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान’ (एनआईओ) के निदेशक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय समुद्री वैज्ञानिकों ने समुद्र में अनुसंधान कायरे के लिए धातु रहित प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है और ऐसी प्रौद्योगिकी दुनिया में केवल चार-पांच देशों के पास है।

उन्होंने कहा कि चीन के पास इस तरह की प्रौद्योगिकी नहीं है और भारतीय वैज्ञानिक इस मामले में काफी आगे हैं।

सिंह ने कहा कि धातुयुक्त प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने से समुद्र से लिए जाने वाले नमूनों में प्रदूषण तत्वों के आने की आशंका रहती है और यदि अनुसंधान नमूनों में प्रदूषक तत्व आ जाएं तो वैज्ञानिकों की सारी मेहनत बेकार हो जाती है।

उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों के धातु रहित प्रौद्योगिकी विकसित कर लेने से अनुसंधान कायरे के लिए एकत्र किए जाने वाले नमूनों के प्रदूषित होने की आशंका नहीं है और वे सफलतापूर्वक अपने अनुसंधान कायरे को अंजाम दे रहे हैं।

‘‘एनआईओ’ निदेशक ने कहा कि समुद्री वैज्ञानिकों के कार्य में संस्थान के खुद के ‘‘सिंधु साधना’ और ‘‘सिंधु संकल्प’ नाम के पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अन्य पोतों के साथ ही इन पोतों से मिल रही मदद ने समुद्री अनुसंधान कार्य में क्रांति लाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि इन दोनों पोतों के जरिए देश के समुद्री वैज्ञानिकों ने कई महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य किए हैं जिनकी सराहना अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में भी हुई है।

उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशाला के रूप में काम करने वाला राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान अब तक तेल एवं गैस कंपनियों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों, रासायनिक उद्योगों तथा अन्य द्वारा वित्तपोषित 1320 से अधिक परियोजनाओं पर सफलतापूर्वक काम कर चुका है।

 


 

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