रेलवे स्टेशन की पहली महिला स्टेशन मास्टर

मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन में 1992 में सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में भर्ती होने वाली श्रीमती ममता कुलकर्णी माटुंगा रेलवे स्टेशन की पहली महिला स्टेशन मास्टर बनीं

रेलवे स्टेशन की पहली महिला स्टेशन मास्टर
रेलवे स्टेशन की पहली महिला स्टेशन मास्टर


कुल 41 महिलाओं का स्टाफ 24 घंटे स्टेशन संचालन का काम करता है

भारतीय रेलवे ने अपनी महिला कर्मचारियों को अधिकार संपन्न बनाने की दिशा में जो कदम उठाये हैं, उनके मद्देनजर माटुंगा रेलवे स्टेशन एक उल्लेखनीय रेलवे स्टेशन बन गया है। इस स्टेशन को लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2018 में शामिल किया गया है। यह भारत का ऐसा पहला स्टेशन है जहां सभी महिला कर्मचारी काम करती हैं। महिलाएं स्टेशन संचालन, वाणिज्य गतिविधि, रेलवे सुरक्षाबल इत्यादि कामों में संलग्न हैं।

मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन ने कुल 41 महिलाओं को नियुक्त किया है, जिनमें से 17 बुकिंग क्लर्क, 6 रेलवे सुरक्षा बल कर्मी, 8 टिकट निरीक्षक, 5 खलासी, 2 उद्घोषक और 2 सफाई कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी स्टेशन मास्टर श्रीमती ममता कुलकर्णी के नेतृत्व में काम कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन में 1992 में सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में भर्ती होने वाली श्रीमती ममता कुलकर्णी माटुंगा रेलवे स्टेशन की पहली महिला स्टेशन मास्टर बन गयी हैं।

पूरा महिला स्टाफ पिछले 6 महिनों से 24 घंटे रेलवे स्टेशन के संचालन संबंधी सभी गतिविधियों को कामयाबी के साथ चला रहा है। इस संबंध में ऐसा माहौल बनाने का उद्देश्य है जहां महिलाएं खुद अपने निजी और व्यावसायिक निर्णय ले सकें तथा उनमें सांगठनिक योग्यता का विकास हो सके।


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