वासनर समझौते का सदस्य बना भारत

वासनर समझौते का सदस्य बना भारत, खुलेगी एनएसजी की राह

वासनर समझौते का सदस्य बना भारत
वासनर समझौते का सदस्य बना भारत

• चीन भले ही भारत के एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) में शामिल होने की राह में बड़ी अड़चन हो लेकिन आने वाले दिनों में भारत की दावेदारी इस समूह की सदस्यता के लिए और मजबूत हो गई है। यह इसलिए हुआ, क्योंकि भारत वासनर समझौते का सदस्य बन गया है। वासनर समझौते का भारत 42वां सदस्य बन गया है।

• इस समझौते को आधुनिक तकनीक, खास तौर पर रक्षा से जुड़े तकनीकी हस्तांतरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें शामिल होने का मतलब यह है कि इसके सदस्य देश यह स्वीकार करते हैं कि भारत बेहद संवेदनशील तकनीक हस्तांतरण के लिए उपयुक्त देश है। ऐसे में जब भारत अगली बार एनएसजी के लिए दावेदारी पेश करेगा तो उसका दावा और गंभीर समझा जाएगा।

• विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि, ‘वैसे तो एनएसजी और वासनर समझौते में कोई सीधा संबंध नहीं है लेकिन इससे पता चलता है कि दुनिया के देश हमें एक जिम्मेदार देश मानते हैं। भारत इस तरह के कुछ और समझौतों का भी सदस्य हाल के महीनों में बना है।

• साफ है कि विश्व बिरादरी हम पर भरोसा करती है।’ जहां तक इसके फायदे की बात है तो भारत अब अंतरिक्ष और रक्षा से जुड़ी बेहद उन्नत तकनीकी को हासिल कर सकेगा, क्योंकि दुनिया के दूसरे देशों पर भारत के साथ कारोबार करने को लेकर कोई दबाव नहीं रहेगा।

• भारत के लिए यह भी एक उपलब्धि है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, लेकिन दुनिया के तमाम देश उसे हथियारों से जुड़े उन्नत तकनीकी हस्तांतरण के योग्य मान रहे हैं।

• माना जा रहा है कि वासनर समझौते के सदस्य देश एनएसजी में भारत की दावेदारी का समर्थन करेंगे। भारत इसके पहले इसी तरह की एक अन्य प्रतिष्ठित मिसाइल तकनीक नियंत्रण समझौते (एमटीसीआर) का भी सदस्य बना है।


 

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