108 वर्ष पुरानी मोनो रेल, अब राष्ट्रीय रेल संग्रहालय

108 वर्ष पुरानी मोनो रेल, अब राष्ट्रीय रेल संग्रहालय
108 वर्ष पुरानी मोनो रेल, अब राष्ट्रीय रेल संग्रहालय

पटियाला के महाराजा द्वारा इस्तेमाल की गई 108 वर्ष पुरानी मोनो रेल अब राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, नई दिल्ली में चालू

स्टीम इंजन से चलने वाली यह मोनो रेल दुनिया में अपने तरह की अनोखी

भारतीय रेलवे की समृद्ध धरोहर को अब दर्शकों के लिए राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में खोल दिया गया है। संग्रहालय में आकर्षण का प्रमुख केन्द्र 108 वर्ष पुरानी मोनो रेल है जिसे पटियाला के महाराजा, स्वर्गीय श्री भूपिन्द्र सिंह इस्तेमाल किया करते थे। हाल में राष्ट्रीय रेल संग्रहालय ने इस ट्रेन को प्रत्येक गुरुवार आगुंतकों के लिए शुरू करने की पहल की। स्टीम इंजन से चलने वाली यह मोनो रेल दुनिया में अपनी तरह की अनोखी है। इस मोनो रेल में यात्रा एक निराला अनुभव है।

इसके अलावा आगुंतक संग्रहालय में अन्य अद्वितीय प्रदर्शनीयों का आनंद ले सकते है

भारत की रेल धरोहर का केन्द्र, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय सभी की रेलवे में दिलचस्पी पैदा करने वाला और आकर्षण का केन्द्र है। इस संग्रहालय का 1 फरवरी, 1977 को औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया था, यह एशिया में अपने किस्म का एक अनूठा संग्रहालय है, जिसमें इतिहास, विरासत, रोमांस, अतीत की झलक, आनंद, आमोद-प्रमोद और मनोरंजन का एक ही स्थान पर दिलचस्प संग्रह है। चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में दस एकड़ क्षेत्र में फैले इस संग्रहालय में एक गैलरी है जो विभिन्न प्रदर्शनियों, मॉडलों, रिकॉर्डों, फोटो, कुल-चिन्हों, दस्तावेजों आदि को समर्पित है। 100 से अधिक वास्ताविक आकार की प्रदर्शित वस्तुएं प्राचीन युग के वैभव को दर्शाती है। यह संग्रहालय दर्शकों को रेलवे के इतिहास और उसकी धरोहर की रोमांचक यात्रा में ले जाती है और देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में उसके योगदान को दिखाती है।

 


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