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Homai Vyarawalla (होमी व्यारावाला)

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Homai Vyarawalla

होमी व्यारावाला (Homai Vyarawalla) भारत की प्रथम महिला छायाकार (फोटोग्राफर) थीं। गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में जन्मी व्यारावाला ने 1930 में फोटोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा । उस वक्त कैमरा ही अपने आप में एक आश्चर्य था। उस पर भी एक महिला का इस क्षेत्र में प्रवेश करना बड़े अचरज की बात थी। उन्होंने 1970 में पेशेवर फोटोग्राफी छोड़ दी थी। सन् २०११ में उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया। होमी व्यारावाला जी के 104 वें जन्म दिवस के अवसर पर गूगल ने उन्हें याद करके उनके सम्मान में डूडल बनाकर सम्मानित किया है। गूगल ने उन्हें “फर्स्ट लेडी ऑफ द लेंस” के तौर पर सम्मानित किया है ।

उनकी पहली तस्‍वीर बोम्‍बे क्रोनिकल में प्रकाशित हुई जिसमें उन्‍हें प्रत्‍येक छायाचित्र के लिए एक रुपया प्राप्‍त हुआ। वह अपने पति के साथ दिल्‍ली आ गई और ब्रिटिश सूचना सेवाओं के कर्मचारी के रूप में स्‍वतंत्रता के दौरान के फोटो लिए।

दिूतीय विश्‍व युद्ध के हमले के बाद, उन्‍होंने इलेस्‍ट्रेटिड वीकली ऑफ इंडिया मैगजीन के लिए कार्य करना शुरू किया जो 1970 तक चला। इसमें इनकी श्‍वेत-श्‍याम छायाचित्र हुए। उनके कई फोटोग्राफ टाईम, लाईफ, दि ब्‍लेक स्‍टार तथा कई अन्‍य अन्‍तरराष्‍ट्रीय प्रकाशनों में फोटो-कहानियों के रूप में प्रकाशित हुए।

व्‍यारवाला के कार्य एवं जीवन के बारे में सबीना गडिहोक ने अपनी पुस्‍तक इन्डिया इन फोकस –केमरा क्रोनिकल ऑफ होमेएव्‍यारवाला में बेहतर ढंग से उल्‍लेख किया है। फोटोग्राफरों से किए गए साक्षात्‍कारों के आधार पर उनकी फोटो-आत्‍मकथा तैयार की गई है।

व्‍यारवाला का पसन्‍दीदा विषय जवाहर लाल नेहरू थे। वे फोटो ग्राफर के लिए उन्‍हें उपयुक्‍त छवि मानती थीं। वह ब्‍लेक एण्‍ड वाईट माध्‍यम को वरियता देती थी।

उनके द्वारा ली गई तस्‍वीरें नेशनल गैलरी ऑफ माडर्न आर्ट मुंबई तथा अल्काजी फाउंडेशन ने मिलकर वर्ष 2010में प्रदर्शित की। वर्ष 2011 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पदम् विभूषण पुरस्‍कार से नवाजा गया।

 


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